Digital Arrest Scam: डिजिटल फ्रॉड से कैसे बचें, जानें सही तरीका!

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आजकल के समय में ठगी और साइबर अपराध बहुत आम हो गए हैं। 'डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड' भी ऐसा ही एक धोखा है, जिसमें लोग अपनी मेहनत की कमाई और निजी जानकारी खो देते हैं। क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग खुद को पुलिस या सीबीआई का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर आपको फंसा सकते हैं? सुनने में ये अजीब लगता है, लेकिन यह सच है। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि डिजिटल अरेस्ट क्या होता है और डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से कैसे बचें। 

इस ब्लॉग में हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि इस तरह की ठगी से कैसे बचा जा सकता है और क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका पैसा और जानकारी सुरक्षित रहे, तो इस लेख को पूरा पढ़ें। यहाँ आपको वो सभी जरूरी बातें मिलेंगी, जो आपकी मदद करेंगी, ताकि आप कभी ऐसे फ्रॉड का शिकार न बनें!

Digital Arrest Scam: डिजिटल फ्रॉड से कैसे बचें, जानें सही तरीका!

    डिजिटल अरेस्ट क्या होता है

    डिजिटल अरेस्ट एक नई तरह की साइबर ठगी है, जिसमें धोखेबाज़ खुद को पुलिस, सीबीआई, या सरकारी अधिकारी बताकर आपको फोन या वीडियो कॉल करते हैं। वे आपको डराने के लिए फर्जी केस या गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया पीड़ित को भावनात्मक और मानसिक रूप से कमजोर करके पैसे ठगने के लिए की जाती है।

    इस घोटाले में, ठग फर्जी दस्तावेज़, पुलिस पहचान पत्र या नोटिस दिखाकर भरोसा दिलाते हैं कि वे असली अधिकारी हैं। इसके बाद, वे आपसे बैंक डिटेल्स, निजी जानकारी, या तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की मांग करते हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिए सतर्क रहना और किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करना बेहद जरूरी है।

    डिजिटल अरेस्ट का अर्थ

    मेरे अनुसार डिजिटल अरेस्ट दो तरह का होता है, एक तो धोखेबाज अपनाते हैं दूसरा सरकार आपकी सुरक्षा के लिए आपको डिजिटल अरेस्ट कर देती है, धोखेबाज वाला तो ऊपर आपने जान लिया अब सरकार वाला भी जान लो, यह डिजिटल अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों या डिजिटल संपत्तियों को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। यह आमतौर पर तब होता है जब किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी या अन्य अवैध गतिविधियों का संदेह होता है। जब किसी व्यक्ति का डिजिटल अरेस्ट होता है, तो वह अपनी ऑनलाइन सेवाओं, जैसे कि बैंकिंग, सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफार्मों का उपयोग नहीं कर सकता।

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के प्रमुख लक्षण

    1. असामान्य लेन-देन: यदि आपके बैंक खाते में असामान्य या संदिग्ध लेन-देन होता है, तो यह डिजिटल अरेस्ट का संकेत हो सकता है।
    2. संदिग्ध ईमेल या संदेश: धोखाधड़ी करने वाले अक्सर फिशिंग ईमेल या संदेश भेजते हैं, जो आपके व्यक्तिगत जानकारी को चुराने की कोशिश करते हैं।
    3. खाते तक पहुंच में समस्या: यदि आप अपने खाते में लॉगिन करने में असमर्थ हैं या आपको बार-बार पासवर्ड बदलने के लिए कहा जाता है, तो यह डिजिटल अरेस्ट का संकेत हो सकता है।
    4. खाते तक पहुंच में समस्यायदि आप अपने ऑनलाइन खातों में लॉगिन करने में असमर्थ हैं या आपको बार-बार पासवर्ड बदलने के लिए कहा जाता है, तो यह संकेत कर सकता है कि आपका खाता किसी ने हैक कर लिया है।
    5. अनजान डिवाइस से लॉगिनयदि आपको अपने खाते में अनजान डिवाइस से लॉगिन करने का नोटिफिकेशन मिलता है, तो यह एक गंभीर संकेत है। इसका मतलब हो सकता है कि कोई अन्य व्यक्ति आपके खाते तक पहुँच बना रहा है।
    6. सुरक्षा प्रश्नों का बदलावयदि आपके सुरक्षा प्रश्नों को बिना आपकी अनुमति के बदला गया है, तो यह भी एक संकेत हो सकता है कि आपके खाते में धोखाधड़ी की जा रही है।
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    डिजिटल अरेस्ट: साइबर क्राइम के बढ़ते उदाहरण

    आजकल डिजिटल अरेस्ट की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिसमें साइबर अपराधी लोगों को झांसा देकर उनके पैसे ठग लेते हैं। यह खतरा अब तक कई लोगों को शिकार बना चुका है, और इनमें से कुछ घटनाएँ तो बेहद चौंकाने वाली हैं।

    दिल्ली के बुजुर्ग से 10 करोड़ की ठगी

    दिल्ली में हाल ही में एक बुजुर्ग व्यक्ति को 10 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। ठगों ने खुद को कस्टम विभाग के अधिकारी के रूप में पेश किया और कहा कि उनके नाम पर विदेश से एक ड्रग्स का पार्सल आया है। डर फैलाते हुए उन्होंने बुजुर्ग को बताया कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस डर के कारण बुजुर्ग ने ठगों की बातों पर विश्वास किया और भारी रकम का भुगतान कर दिया।

    अन्नया फरीदाबाद डिजिटल अरेस्ट केस

    फरीदाबाद की अन्नया के साथ भी एक ऐसी ही घटना हुई, जिसमें उसे डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसा लिया गया। अन्नया को एक अज्ञात कॉल आई, जिसमें कस्टम विभाग के अधिकारी ने उसे बताया कि उसके खिलाफ एक केस दर्ज है। बाद में उसे स्काइप पर पुलिस और सीबीआई अधिकारियों से मिलवाया गया। डर के मारे अन्नया ने 2.5 लाख रुपये ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए।

    हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक मंत्री की कंपनी के साथ हुई करोड़ों की ठगी इन घटनाओं से साफ जाहिर है कि डिजिटल अरेस्ट का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और कोई भी इसका शिकार हो सकता है।

    डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते खतरे

    इन घटनाओं से यह साफ है कि डिजिटल अरेस्ट का खतरा कहीं से भी आ सकता है, और कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है। साइबर अपराधी लोग विभिन्न तरीकों से शिकार ढूंढते हैं और डर के जरिए उन्हें अपनी बातों में फंसा लेते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें।

    सरकार क्या कर रही है

    सरकार डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से निपटने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। अब तक सरकार ने 6 लाख से अधिक मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जो साइबर अपराधों को अंजाम देने में इस्तेमाल हो रहे थे। इसके साथ ही 700 से ज्यादा मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किया गया है, जो लोगों की व्यक्तिगत जानकारी चुरा रहे थे। इसके अलावा, लगभग 3 लाख बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया है, जिनसे धोखाधड़ी और अवैध लेन-देन हो रहे थे।

    सरकार ने साइबर क्राइम सेल्स बनाए हैं, जो इन अपराधों पर नजर रखते हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रहे हैं। अपराधियों को कड़ी सजा दी जा रही है, हालांकि कुछ ऐसे अपराधी हैं जो अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, और उनके खिलाफ अभियान जारी है। इनमें से कुछ अपराधी विदेशों से कॉल करके लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं, इसलिए हमें बहुत सतर्क रहना होगा।

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचने के उपाय

    डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा धोखा है जिसमें ठग आपको डराकर आपके पैसे ले लेते हैं। वे खुद को पुलिस या सीबीआई का अधिकारी बताकर आपको फोन करते हैं और कहते हैं कि आपके खिलाफ कोई केस चल रहा है। अगर आपने पैसे नहीं दिए तो आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

    सुरक्षित रहने के टिप्स

    1. डिजिटल सुरक्षा को बढ़ाएं: अपने फोन और लैपटॉप पर सुरक्षा सेटिंग्स को कड़ा करें। मजबूत पासवर्ड और दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करें।
    2. मजबूत पासवर्ड बनाएं: अपने सभी अकाउंट्स के लिए मजबूत पासवर्ड बनाएं और उन्हें नियमित रूप से बदलते रहें।
    3. अपने डिवाइस को अपडेट रखें: अपने स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य डिवाइसों को हमेशा अपडेट रखें ताकि उनमें कोई सुरक्षा खामी न रह जाए।
    4. वायरस और मैलवेयर से बचें: अपने डिवाइस पर एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे हमेशा अपडेट रखें। इससे आपके डिवाइस को वायरस और मालवेयर से बचाया जा सकता है।
    5. संदिग्ध लिंक से बचें: अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, क्योंकि ये लिंक आपको धोखाधड़ी की वेबसाइटों पर ले जा सकते हैं।
    6. दो-कारक प्रमाणीकरण (Two-factor Authentication) का इस्तेमाल करें: जहां भी संभव हो, दो-कारक प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करें।

    डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें

    1. संदिग्ध कॉल से बचें: अगर आपको कोई फोन कॉल आता है जिसमें कहा जाए कि आप पर कोई केस है या आपको गिरफ्तार किया जाएगा, तो तुरंत उस कॉल को काट दें, और ऐसी कॉल न उठाएं। पुलिस कभी भी फोन पर इस तरह की जानकारी नहीं देती।
    2. किसी भी तरह की धमकी से डरें नहीं: अगर कोई आपको धमकाता है और कहता है कि आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा, तो घबराएं नहीं।
    3. ऑफिशियल वेबसाइट या नंबरों पर ही संपर्क करें: अगर आपको किसी सरकारी काम के लिए किसी अधिकारी से संपर्क करना है, तो हमेशा उनकी ऑफिशियल वेबसाइट या नंबर पर ही संपर्क करें
    4. व्यक्तिगत जानकारी न दें: किसी भी अनजान व्यक्ति या कॉलर को अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे बैंक अकाउंट नंबर, पासवर्ड आदि न दें।
    5. पैसे मांगने पर सावधान रहें: अगर कोई आपसे फोन पर पैसे मांगता है, तो समझ जाइए कि ये धोखा है
    6. रिकॉर्ड करें: ऐसी काल को रिकॉर्ड कर लें और अगर वीडियो काल हो तो स्क्रीन शोर्ट लें या स्क्रीन रिकॉर्ड कर लें
    7. साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं: अगर आपको लगता है कि आप डिजिटल अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं, तो तुरंत साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।
    8. पैसे ट्रांसफर न करें: किसी भी अनजान कॉल से कहा जाए कि आपको पैसे ट्रांसफर करने होंगे, तो पैसे न भेजे और मामले की रिपोर्ट पुलिस को करें।

    डिजिटल अरेस्ट एडवाइजरी

    सरकार ने इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा कि डिजिटल अरेस्ट का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। 

  • पुलिस कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगेगी।
  • पुलिस कभी भी आपको फोन पर धमकाएगी नहीं।
  • अगर आपको कोई धोखा देने की कोशिश कर रहा है, तो धैर्य रखें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।
  • अगर आपको कोई संदेह होता है, तो अपने परिवार और दोस्तों को बताएं।
  • अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर साझा की गई जानकारी को सीमित रखें। अनजान लोगों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी न दें।
  • यदि आपको किसी प्रकार का धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि का सामना करना पड़ता है, तो तुरंत संबंधित सेवा प्रदाता या पुलिस को रिपोर्ट करें।
  • Digital Arrest Scam: डिजिटल फ्रॉड से कैसे बचें, जानें सही तरीका!

    पीएम मोदी की चेतावनी: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड

    अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में साफ कहा कि भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी को फोन पर गिरफ्तार किया जा सके। यानी, पुलिस कभी भी आपको फोन करके यह नहीं कहेगी कि आप गिरफ्तार हो गए हैं। डिजिटल अरेस्ट कर लोगो को कैसे फसाया जाता है इस वीडियो में आप देख सकते हैं, इसे एक बार पूरा देखें.

    क्या करें अगर आप शिकार बन गए हैं

    अगर आप डिजिटल अरेस्ट डिजिटल अरेस्ट या साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाना बहुत जरुरी है: जैसे 

    तुरंत कार्रवाई करें:

    जैसे ही आपको लगे कि आप धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, तुरंत कार्रवाई करें। किसी भी अनजान व्यक्ति से संपर्क करने के बाद अगर आपको संदेह हो, तो उस नंबर को तुरंत ब्लॉक कर दें और कॉल रिकॉर्ड्स को संभाल कर रखें।

    बैंक से संपर्क करें:

    अगर आपको किसी धोखाधड़ी के कारण पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया है या बैंक खाते से पैसे निकाले गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। उन्हें घटना के बारे में बताएं और अपने खाते को अस्थायी रूप से लॉक करवा लें। इसके साथ ही, ट्रांजैक्शन को रोकने के लिए बैंक को अनुरोध भेजें। अगर आपने कोई पेमेंट किया है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और ट्रांजेक्शन को रद्द करने का अनुरोध करें। अपने बैंक के आधिकारिक ग्राहक सेवा नंबर पर कॉल करके तुरंत उन्हें अपनी स्थिति बताएं।

    पुलिस में शिकायत दर्ज करें:

    सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि आप अपनी नजदीकी पुलिस स्टेशन में साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करें। साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस को हर संभव जानकारी और सबूत दें, जैसे कि कॉल रिकॉर्ड्स, स्क्रीनशॉट, या बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स।

    साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें:

    भारत में साइबर अपराधों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 1930 है, जिस पर आप तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    संदिग्ध लिंक और एप्लिकेशन से बचें:

    भविष्य में साइबर ठगों से बचने के लिए हमेशा संदिग्ध लिंक या एप्लिकेशन से दूर रहें। अपने डिवाइस में एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और नियमित रूप से अपडेट करते रहें।

    कानूनी सलाह लें:

    अगर जरूरत हो तो, किसी वकील से सलाह लें। वे आपको कानूनी प्रक्रिया के बारे में बता सकते हैं और आपको मदद कर सकते हैं।

    डिजिटल अरेस्ट ऑनलाइन शिकायत कैसे करें

    डिजिटल अरेस्ट से संबंधित समस्याओं और धोखाधड़ी के मामलों की शिकायत करने के लिए आप cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं इसके अलावा भारत सरकार ने एक पोर्टल लॉन्च किया है, जिसे 'चक्षु' कहा जाता है। यह पोर्टल टेलीकॉम विभाग द्वारा स्थापित किया गया है, जिससे उपयोगकर्ता स्पैम कॉल, मैसेज, और व्हाट्सएप पर आने वाली फर्जी कॉल्स की शिकायत कर सकते हैं। यहाँ हम जानेंगे कि आप चक्षु पोर्टल पर अपनी शिकायत कैसे दर्ज कर सकते हैं।

    चक्षु पोर्टल पर शिकायत कैसे करें?

    • सबसे पहले, अपने ब्राउज़र में https://sancharsaathi.gov.in/sfc/ टाइप करें और वेबसाइट खोलें।
    • वेबसाइट पर जाने के बाद,आपको दो विकल्प दिखाई देंगे , संदिग्ध धोखाधड़ी संचार की रिपोर्ट करें (पिछले 30 दिनों के भीतर प्राप्त), 
    • अनचाहे वाणिज्यिक संचार (UCC) / स्पैम की रिपोर्ट करें (कार्रवाई हेतु 3 दिन के भीतर रिपोर्ट करें) अपने अनुसार चयन कर उस पर क्लिक करें।
    Digital Arrest Scam: डिजिटल फ्रॉड से कैसे बचें, जानें सही तरीका!
    • आपको अपनी शिकायत से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी भरनी होगी। इसमें आपके नाम, संपर्क नंबर, और समस्या का विवरण शामिल होना चाहिए।
    • यदि आपके पास कोई स्क्रीनशॉट या कॉल रिकॉर्डिंग है, तो उसे भी अपलोड करें। यह आपकी शिकायत को मजबूत बनाने में मदद करेगा।
    • सभी जानकारी भरने के बाद, "सबमिट" बटन पर क्लिक करें। आपकी शिकायत सफलतापूर्वक दर्ज हो जाएगी।
    • आप अपनी शिकायत की स्थिति को भी ट्रैक कर सकते हैं। इसके लिए आपको वेबसाइट पर दिए गए ट्रैकिंग विकल्प का उपयोग करना होगा।

    Digital Arrest (FAQs)

    डिजिटल अरेस्ट क्या है?

    डिजिटल अरेस्ट एक आधुनिक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग खुद को सरकारी अधिकारी, पुलिस, या कस्टम अधिकारी बताकर डराने का प्रयास करते हैं। वे लोगों को फर्जी केस और गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं।

    डिजिटल अरेस्ट से कैसे बच सकते हैं?

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचने के लिए इन सावधानियों का पालन करें:

    • किसी अनजान कॉलर की धमकियों से डरें नहीं।
    • अपनी व्यक्तिगत जानकारी या बैंक डिटेल्स साझा न करें।
    • संदिग्ध कॉल्स और ईमेल्स को तुरंत रिपोर्ट करें।
    • साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

    डिजिटल अरेस्ट हेल्पलाइन नंबर क्या है?

    अगर आप डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का शिकार होते हैं या इसके शिकार होने से बचना चाहते हैं, तो भारत में साइबर अपराध की शिकायत करने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, अगर किसी विदेशी नंबर से ऐसा फ्रॉड कॉल आता है, तो आप 1963 या 1800-11-0420 पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह कदम आपकी और आपकी जानकारी की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड कैसे होता है?

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में ठग फर्जी कॉल्स या वीडियो कॉल्स के जरिए खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे बैंक खाते ब्लॉक होने, गिरफ्तारी, या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।

    निष्कर्ष

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड एक गंभीर साइबर अपराध है, जो डर और भ्रम फैलाकर लोगों को ठगता है। इससे बचने के लिए सतर्क रहना, अनजान कॉल्स और फर्जी दस्तावेज़ों पर भरोसा न करना बेहद जरूरी है। डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से कैसे बचें, इसके लिए जानकारी होना ही पहला कदम है। अगर यह लेख आपको उपयोगी लगा, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें, ताकि वे भी ऐसे फ्रॉड से सुरक्षित रह सकें। अपने विचार नीचे कमेंट में लिखें! 🙌

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